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Nautapa क्या होता है?

इस साल अर्थात 2020 में नौतपा 25 मई से लेकर 3 जून तक चलने वाला है। तो आइए जानते हैं कि नौतपा क्या है? और क्यों यह हर साल आता है? और हर साल आता है?

नौतपा क्या होता है? Noutapa kya Hota Hai?

नुतापा एक प्रकृति खगोलीय घटनाएं है को हर साल होता है।सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा शुरू हो जाता है, इस बार 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को 8 बजकर 24 मिनट पर प्रवेश करेगा जो 3 जून तक इसी नक्षत्र में रहेगा। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा शुरू हो जाता है, इस बार 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को 8 बजकर 24 मिनट पर प्रवेश करेगा जो 3 जून तक इसी नक्षत्र में रहेगा।

सूर्य के वृष राशि के 10 अंश से 23 अंश 40 कला तक नौतपा कहलाता है। इस दौरान तेज गर्मी रहने पर बारिश के अच्छे योग बनते है। सूर्य 8 जून तक 23 अंश 40 कला तक रहेगा।

Noutapa Kyo Hota Hai? नौतपा क्यों होता है?

दरअसल रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा होता है। सूर्य तेज और प्रताप का प्रतीक माना जाता है जबकि चंद्र शीतलता का प्रतीक होता है। सूर्य जब चांद के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो सूर्य इस नक्षत्र को अपने प्रभाव में ले लेता है जिसके कारण ताप बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस दौरान ताप बढ़ जाने के कारण पृथ्वी पर आंधी और तूफान आने लगते है।

इन दिनों में शरीर तेज़ी से डिहाइड्रेट होता है जिसके कारण डायरिया, पेचिस, उल्टियां होने की संभावना बढ़ जाती है अतः नीम्बू पानी, लस्सी, मट्ठा (छांछ), खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजे का भरपूर प्रयोग करें, बाहर निकलते समय सिर को ढक कर रखें अन्यथा बाल बहुत तेज़ी से सफेद होंगे, झड़ेंगे।

भारतीय ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा जब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आर्द्रा से स्वाति नक्षत्र तक अपनी स्थितियों में हो एवं तीव्र गर्मी पड़े, तो वह नवतपा है। मानना है कि सूर्य वृष राशि में ही पृथ्वी पर आग बरसाता है और खगोल शास्त्र के अनुसार वृषभ तारामण्डल में यह नक्षत्र हैं कृतिका, रोहिणी और मृगशिरा (वृषभो बहुलाशेषं रोहिण्योऽर्धम् च मृगशिरसः) जिसमें कृतिका सूर्य, रोहिणी चंद्र, मृगशिरा मंगल अधिकार वाले नक्षत्र हैं इन तीनों नक्षत्रों में स्थित सूर्य गरमी ज्यादा देता है ।

अब प्रश्न यह कि इन तीनों नक्षत्रों में सर्वाधिक गरम नक्षत्र अवधि कौन होगा इसके पीछे खगोलीय आधार है इस अवधि मे सौर क्रांतिवृत्त में शीत प्रकृति रोहिणी नक्षत्र सबसे नजदीक का नक्षत्र होता है।

जिसके कारण सूर्य गति पथ में इस नक्षत्र पर आने से सौर आंधियों में वृद्धि होना स्वाभाविक है इसी कारण परिस्थितिजन्य सिद्धांत कहता है कि जब सूर्य वृष राशि में रोहिणी नक्षत्र में आता है उसके बाद के नव चंद्र नक्षत्रों का दिन नवतपा है ।

बुध का शनि से समसप्तक योग भी नवतपा में बन रहा है। समसप्तक योग से झुलसा देने वाली गर्मी पड़ेगी। जो अच्छी वर्षा के संकेत दे रहा है। हालांकि इस दौरान कुछ जगहों पर तेज आंधी के भी योग बन रहे हैं। इस साल नौतपा नहीं गलने वाला है अत: पिछले साल के मुकाबले बारिश के योग ज्यादा बेहतर है।

हालांकि कुछ दिन ऐसे भी रहेंगे जब खंडवर्षा के योग बनेंगे, लेकिन इसके बावजूद शेष बचे दिन बेहतर बारिश की सौगात देकर धरती के आंचल को हरा-भरा कर देंगे। नौतपा तपने से वर्षा अच्छी होगी और अच्छी वर्षा से बेहतर खाद्यान्न उत्पादन के भी योग बन रहे हैं।

शनि मंगल की स्थिति जल तत्व में होने से कहीं-कहीं बादल फटने के समाचार भी मिलेंगे। कहीं वर्षा से जन-धन की हानि के योग भी बनते हैं। मंगल जल तत्व की राशि वृश्चिक में होने से मंगल का अग्नि तत्व प्रभाव नष्ट होकर सौम्य असर देगा। इसी कारण वर्षा के योग उत्तम हैं।

तो आप लोगो को यह पोस्ट नौतपा क्या होता है? और क्यों होता है? कैसी लगी comment में जरूर बताइएगा, धन्यवाद।

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